Er. Santosh Kumar
रजौली प्रखंड क्षेत्र के धमनी गांव से बुढ़ियासाख गांव आने-जाने वाले ग्रामीणों को बीते दो महीनों से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.धमनी से बुढ़ियासाख गांव के संपर्क पथ के बीच में खुरी नदी पड़ती है और सड़क निर्माण के दौरान नदी के ऊपर पुलिया का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग के तेजस्वी संवेदक द्वारा करवाया गया था.इस वर्ष बारिश के शुरुआती दिनों जुलाई माह के मध्य में हुए बारिश से नदी के ऊपर बने पुल के समीप के सड़कों को पानी अपने साथ बहा ले गई.पुलिया के क्षतिग्रस्त होने की सूचना नवादा डीएम रवि प्रकाश को मिलते ही वे बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र धमनी-बुढ़ियासाख संपर्क पथ का निरीक्षण जिले के वरीय पदाधिकारियों के साथ एसडीएम रजौली स्वतंत्र कुमार सुमन, ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार,सीओ मो. गुफरान मजहरी एवं सड़क निर्माणकर्ता संवेदक अंगद कुमार सिन्हा के साथ किया.निरीक्षण के दौरान डीएम को ग्रामीणों ने बताया कि ग्रामीण कार्य विभाग के संवेदक द्वारा पुलिया और सड़क निर्माण में लापरवाही बरती गई थी.ग्रामीणों की मांग थी कि बड़ा और मजबूत पुल बनाया जाए,लेकिन संवेदक ने उनकी मांग को अनदेखा कर दिया,जिसके परिणामस्वरूप यह स्थिति उत्पन्न हो गई.डीएम ने निरीक्षण के दौरान ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता को डायवर्सन बनाकर ग्रामीणों के आवागमन को सुचारू करने को निर्देशित किया था.
दो बार बना डायवर्शन सड़क टूटा,स्थिति यथावत :-
धमनी व बुढ़ियासाख गांव के ग्रामीण सिकंदर राजवंशी,टिहन राजवंशी,रामस्वरूप राजवंशी,मुन्ना कुमार समेत दर्जनों लोगों ने बताया कि डीएम के निर्देश पर अगले दिन क्षतिग्रस्त पुलिया के समीप ह्यूम पाइप डालकर डायवर्सन सड़क बनाया गया था,जो उसी रात्रि के बारिश में बह गया.उसके बाद ग्रामीणों ने पुनः स्थानीय प्रशासन को शिकायत की,तो एक बार पुनः डायवर्सन सड़क बनाया गया,जो महज दो दिनों बाद पानी में बह गया.ग्रामीणों ने कहा कि संवेदक यदि शुरुआत में ही छोटे पुलिया के जगह नदी के अनुसार बड़े पुल बनवाते,तो आज ग्रामीणों को नदी में घुसकर डरे-सहमे आवागमन नहीं करना पड़ता.वहीं नदी को पार करने के दौरान कई बाइक भी फंस जाती है,जिसे नदी में स्नान कर रहे बच्चों द्वारा मदद से निकाला जाता है.यदि नदी में कोई स्नान नहीं कर रहा होता है,तो फंसे बाइक सवारों को किसी अन्य लोगों के आने का इंतजार करना पड़ता है.इस स्थिति में राहगीर अपने जान को जोखिम में डालने को मजबूर हैं.
शिक्षक-शिक्षिकाओं को होती है परेशानी :-
रजौली मुख्यालय से सवैयाटांड़ पंचायत की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है.इसी रास्ते से दर्जनों शिक्षक-शिक्षकाएं नदी में घुसकर भींगते हुए अपने-अपने विद्यालय जाने को मजबूर हैं.इस दौरान शिक्षिकाओं को स्कूल से ले जाने और वापस घर आने के लिए एक सहयोगी की जरूरत पड़ती है.कभी-कभी नदी में अधिक पानी रहने से शिक्षकों समेत अन्य ग्रामीणों को पूर्णतः भींगना भी पद जाता है.
क्या कहते हैं कार्यपालक अभियंता :-
इस बाबत ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार ने बताया कि बारिश के कारण दो बार निर्माण करवाया गया डायवर्सन टूट गया है.उन्होंने मौसम ठीक होने के बाद अग्रतर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है.










