हरदिया डैम में 136 फिशिंग केज में हो रहे मछली पालन का डीएम ने किया निरीक्षण,फ्लोटिंग रेस्टोरेंट व स्कूटर आदि से सुसज्जित होगा हरदिया डैम,पर्यटन स्थल का लुफ्त उठा सकेंगे लोग

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Er. Santosh Kumar 

रजौली प्रखंड क्षेत्र के हरदिया पंचायत स्थित हरदिया डैम (फुलवरिया जलाशय) में 136 फिशिंग केज में हो रहे मछली पालन का निरीक्षण सोमवार की दोपहर डीएम नवादा रवि प्रकाश ने किया.इस दौरान मत्स्य विभाग के मगध परिक्षेत्र के विपिन शर्मा,संयुक्त मत्स्य निदेशक सूरज कुमार,एसडीएम रजौली स्वतंत्र कुमार सुमन,जिला मत्स्य पदाधिकारी मनीष कुमार कुंदन,सीओ मो. गुफरान मजहरी,रिजर्वायर से राज्ञभूषण कुमार और नंदन कुमार के अलावे मछली पालन के बंदोबस्तीधारी कौशल कुमार भी मौजूद रहे.डीएम ने हरदिया डैम में हो रहे मछली पालन योजनाओं का गहनता से निरीक्षण कर जरूरी जानकारियां ली एवं संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए.साथ ही डैम को पर्यटन स्थल बनाने को की दिशा में सुरक्षित फ्लोटिंग रेस्टोरेंट व पानी में संचालित होने वाले स्कूटर की व्यवस्था को लेकर भी विचार विमर्श किए.

रजौली में बढ़ेगा मत्स्य उत्पादन :- 

डीएम ने हरदिया डैम के बीचोबीच में स्थापित 136 फिशिंग केजों में हो रहे पंगेसियस मछली (जासर मछली) के पालन के भौतिक निरीक्षण के दौरान बताया कि खुले डैम के अपेक्षा कई गुना ज्यादा केज में मछली का उत्पादन किया जाता है.इस डैम में लगभग 500 फिशिंग केज लगाया जाना है,जिसमें अभी 136 फिशिंग केज स्थापित कर मछली पालन किया जा चुका है.उन्होंने कहा कि केज फिशिंग से अधिक उत्पादन होने से व्यापार और आमदनी में बढ़ोत्तरी होती है.साथ ही कहा कि जिले के अन्य डैम में भी केज के जरिए मछली पालन परियोजना स्थापित की जाएगी.

प्रति हेक्टेयर बढ़ा मछली का उत्पादन :- 

मत्स्य विभाग के मगध परिक्षेत्र के उपनिदेशक विपिन शर्मा ने बताया कि हरदिया डैम का फैलाव 571 हेक्टेयर (1400 एकड़) की भूमि पर पूर्व में परम्परागत तरीके से मछली पालन किया जा रहा था.वर्ष 2024 से 2029 तक के लिए हरदिया डैम में मछली पालन हेतु 39.97 लाख रुपए में बंदोबस्त कौशल कुमार को किया गया है.उन्होंने बताया कि भारत के रिजर्वायर में औसतन 100 किलो प्रति हेक्टेयर मछली उत्पादन होता है.जबकि पूर्व में बिहार में मछली उत्पादन 1 किलो प्रति हेक्टेयर उत्पादन हुआ करता था.उन्होंने बताया कि अभी 150 किलो प्रति हेक्टेयर से अधिक का मछली उत्पादन किया जा रहा है.

ग्रामीण रोजगार का हुआ सृजन :- 

हरदिया डैम में प्रतिदिन लगभग 700 किलो मछली निकालकर बेची जा रही है,जो रजौली के अलावे अन्य जिलों में भेजा जा रहा है.मछली पालन से लगभग 80 से 90 लोगों को सीधा रूप से रोजगार मिला है,जिसमें मछुआरे,गार्ड,केज संरक्षक आदि शामिल है.

4 करोड़ की लागत से बना 136 केज :- 

खुले डैम में सुरक्षित मछली पालन कर उसे निकालना काफी कठिन काम है.किंतु केज में पल रहे मछलियों का संपर्क सीधे डैम से होता है और जब मछली का साइज 1 किलो के आसपास होता है,तो उसे निकालकर बाजार ले जाया जाता है.उन्होंने बताया कि 1 केज के निर्माण में 1.5 लाख रुपए और 1.5 लाख रुपए पालने में खर्च होते हैं,अर्थात कुल खर्च 3 लाख रुपए हैं.इस प्रकार 136 केज में मछली पालन हेतु लगभग 4 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं.

पंगेसियस मछली के फायदे :- 

पंगेसियस मछली (जासर मछली) की वृद्धि दर अधिक होती है,यह 4 से 5 महीनों में तैयार हो जाती है.इसकी मांग घरेलू एवं विदेशी कंपनी में ज्यादा है.इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक है.वायुवासी के कारण कम प्यास आक्सीजन वाले पानी में भी जिंदा रहना संभव है.इसके शरीर में बहुत ही कम कांटे पाए जाते हैं,जिसे खाना अन्य मछलियों के अपेक्षाकृत सुविधाजनक होता है.यह कृत्रिम भोजन बहुत आसानी से ग्रहण कर लेता है.

हरदिया डैम के सौंदर्यीकरण की संभावना बढ़ी :-

केज फिशिंग से पूर्व हरदिया डैम का उपयोग सिंचाई और परंपरागत ढंग से मछली पालन के लिए किया जाता था.वहीं स्थानीय लोग कई वर्षों से इसे पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग कर रहे थे.हरदिया डैम के चारों ओर श्रृंगी ऋषि पहाड़ है और पहाड़ों से घिरा डैम किसी भी व्यक्ति का मन मोह लेता है.हरदिया डैम में केज फिशिंग के बाद डीएम नवादा के द्वारा इसमें तैरता हुआ रेस्टोरेंट और पानी में चलने वाले स्कूटर समेत कई अन्य योजनाओं को स्थापित करने की दिशा में पहल की जा रही है.इससे आमलोगों में यह आश जगी है कि हरदिया डैम,जो वर्षों से पर्यटक स्थल बनने का रास्ता जोह रहा था,अब पूरा होने के करीब है.

Bihar News 27
Author: Bihar News 27

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