अनुमंडलीय अस्पताल रजौली में लापरवाही की पराकाष्ठा,छत पर खुले में सड़ रहे लाखों के बेड,अस्पताल प्रशासन की अनदेखी से सरकारी संपत्ति की बर्बादी,मरीजों की मुश्किलें बढ़ीं

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Er. Santosh Kumar

स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के सरकारी दावों के बीच रजौली के 75 शैय्या अनुमंडलीय अस्पताल से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है.अस्पताल की छत पर दर्जनों वर्चुअल बेड खुले में पड़े हुए हैं, जो धूप,बारिश और धूल में धीरे-धीरे कबाड़ में बदल रहे हैं.इनमें से कई बेड बिल्कुल सही स्थिति में हैं और मरीजों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते थे,लेकिन अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण ये बर्बाद हो रहे हैं.यह दृश्य न सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि आखिर क्यों मरीजों को बेड की कमी से जूझना पड़ता है,जबकि अस्पताल में इतने सारे बेड उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें बेकार छोड़ा जा रहा है.अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को अक्सर बेड न मिलने की शिकायत रहती है,लेकिन इस लापरवाही को देखकर लगता है कि प्रशासन को इसकी कोई परवाह नहीं है.स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त किया है.उन्होंने प्रशासन से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है.उनका कहना है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.सरकारी संपत्ति की यह बर्बादी न सिर्फ आर्थिक नुकसान है, बल्कि यह स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर करती है.

इस प्रकार की लापरवाही ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ इमारतों और उपकरणों से नहीं मिलती,बल्कि इसके लिए कुशल प्रबंधन और जवाबदेही भी जरूरी है.जब तक लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी,तब तक ऐसी समस्याएं बनी रहेंगी और इसका खामियाजा सिर्फ आम जनता को भुगतना पड़ेगा.इस मामले में अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी डीएस डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि अस्पताल के विभिन्न वार्डों में खराब पड़े बेडों को छत पर रखा गया है.विभागीय आदेश के बाद ही बेडों की मरम्मती अथवा नीलामी की जाएगी.

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Author: Bihar News 27

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