रजौली फुलवरिया जलाशय का पानी नहीं मिलने से किसान बेहाल, गेहूं की बुवाई में हो रही भारी देरी,सैकड़ों गांव प्रभावित

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नहर की खुदाई कार्य जारीनहर में पानी छोड़ने के लिए 20 दिसंबर की तारीख तय होने से सैकड़ों गांवों के किसानों में रोष, एसडीओ से कई बार गुहार लगाने के बाद भी नहीं मिली राहत

 

 

 

मनीष सिंह (रजौली) 

 

नवंबर के अंतिम सप्ताह में धान की कटाई पूरी होने के बाद, रजौली फुलवरिया जलाशय पर निर्भर रहने वाले सैकड़ों गांवों के किसान अब अपनी मुख्य रबी फसल,गेहूं की बुवाई करने में भारी कठिनाई का सामना कर रहे हैं। जलाशय का पानी नहरों (कनाल) में नहीं छोड़े जाने के कारण किसानों की जमीनें सूखी पड़ी हैं, जिससे गेहूं की बुवाई का उपयुक्त समय निकलता जा रहा है और बुवाई में अत्यधिक देरी हो रही है।भड़रा गांव के किसान छोटेलाल सिंह, झुलन सिंह, पंकज सिंह, और राजो यादव समेत कई अन्य किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे धान की कटनी समाप्त होने के बाद से ही कनाल में डैम का पानी छोड़े जाने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गेहूं की समय पर बुवाई के लिए जमीन में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है, लेकिन सिंचाई के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा है। किसानों का एक जत्था सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कई बार मिलकर पानी खोलने की गुहार लगा चुका है।

सिंचाई के अभाव में किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं, क्योंकि इस देरी से उनकी आगामी फसल की पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा।

 

 

 

किसानों में भारी रोष,20 दिसंबर की तारीख बनी परेशानी का सबब:-

 

 

रजौली प्रखंड क्षेत्र के जोगियामारण, शिरोडाबर, टकुआटांड़ आदि पंचायतों के दर्जनों गांवों के किसान इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हैं। प्रखंड क्षेत्र के प्रभावित गांवों में राधे बिगहा, बरवा, कुंभियातरी,भड़रा, भीत्ता, जोगियामारण,चांदे बारा के अलावे सिरदला प्रखंड के दर्जनों आदि शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भड़रा गांव के किसान छोटेलाल सिंह, झुलन सिंह, पंकज सिंह, राजो यादव, और योगेश्वर महतो समेत कई अन्य किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे धान की कटाई समाप्त होने के बाद से ही कनाल में डैम का पानी छोड़े जाने का इंतजार कर रहे हैं।किसान बताते हैं कि गेहूं की समय पर बुवाई के लिए जमीन में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है, जिसे ‘ओट’ कहा जाता है। लेकिन सिंचाई के अभाव में उनकी जमीनें पथरीली हो गई हैं और बुवाई के लिए तैयार नहीं हैं।किसानों का आरोप है कि ‘हमारा जीवन खेती पर निर्भर है, और सिंचाई विभाग के कठोर रवैये से हमारी आजीविका खतरे में है। हम कई बार एसडीओ साहब से गुहार लगा चुके हैं,लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। हर बार हमें बस 20 दिसंबर की तारीख बताई जाती है, जबकि बुवाई का सही समय अब निकल रहा है’।

 

 

 

सिंचाई विभाग का टाल-मटोल भरा रुख:-

 

 

किसानों की बार-बार की गई गुहार के बावजूद, सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई पहल नहीं की जा रही है। सिंचाई परियोजना के सहायक कार्यपालक पदाधिकारी (एसडीओ)ने किसानों से साफ तौर पर कह दिया है कि सरकार द्वारा 20 दिसंबर की निश्चित समय सीमा पर ही कनाल में पानी छोड़ा जाएगा। एसडीओ का तर्क है कि ऊपर से आए निर्देश का पालन किया जा रहा है और वे अपने स्तर पर इसमें बदलाव नहीं कर सकते।सिंचाई विभाग के इस कठोर और अडिग रवैये से सैकड़ों गांव के किसानों में रोष व्याप्त है। किसानों को आशंका है कि इस अत्यधिक देरी से न केवल उनकी गेहूं की पैदावार प्रभावित होगी, बल्कि खेत तैयार करने और बुवाई का पूरा चक्र भी अस्त-व्यस्त हो जाएगा।

 

समय पर बुवाई का महत्व और नुकसान:-

 

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, रबी की फसल (गेहूं) की बुवाई के लिए नवंबर का अंतिम सप्ताह और दिसंबर का शुरुआती सप्ताह सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस अवधि में बुवाई करने से फसल को उचित मौसम मिलता है, जिससे पैदावार अच्छी होती है और फसल कटाई के समय तक गर्म हवाओं के प्रकोप से बची रहती है। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार,’गेहूं की अच्छी उपज के लिए तापमान और नमी का संतुलन आवश्यक है। यदि बुवाई 20 दिसंबर के बाद की जाती है, तो फसल को पकने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता और फरवरी-मार्च में बढ़ने वाली गर्मी के कारण दाना सिकुड़ जाता है। इससे प्रति एकड़ पैदावार में 10% से 30% तक की गिरावट आ सकती है’। यानी, 20 दिसंबर तक पानी खुलने का इंतजार करने से बुवाई में कम से कम दो से तीन सप्ताह की अत्यधिक देरी हो जाएगी, जिसका सीधा और गंभीर असर किसानों की आय और क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।

 

 

प्रशासन से किसानों की मार्मिक अपील:-

 

 

रजौली प्रखंड एवं सिरदला प्रखंड के दर्जनों गांवों के किसानों ने एकजुट होकर जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों से मार्मिक अपील की है।उन्होंने मांग की है कि उनकी समस्याओं की गंभीरता को देखते हुए 20 दिसंबर की समय सीमा का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और तत्काल जलाशय का पानी नहरों में छोड़ा जाए।किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो वे अपने कृषि उपकरणों के साथ सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस समय सबसे बड़ी जरूरत है कि प्रशासन किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रुख अपनाए और उनके जीवनयापन को सुरक्षित करने के लिए त्वरित कार्यवाही करे।

 

 

 

क्या कहते हैं सिंचाई विभाग के पदाधिकारी:-

 

 

सिंचाई विभाग के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ब्रजेश कहते हैं कि कनाल में कंक्रीट का निर्माण कार्य चल रहा है।इसलिए कनाल में डैम का पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।उन्होंने कहा कि ठेकेदार को जल्द ही निर्माण कार्य पूरा करने को लेकर आवश्यक निर्देश दिया है।साथ ही आश्वासन दिया कि अगले एक सप्ताह में कनाल से पानी किसानों के खेतों तक मिलना शुरू हो जाएगा।

 

Bihar News 27
Author: Bihar News 27

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!