Er. Santosh Kumar
रजौली नगर पंचायत समेत प्रखंड क्षेत्र में गणेश चतुर्थी का त्योहार नजदीक आते ही रजौली के कलाकारों की कला जीवंत हो उठी है। शहर के मूर्तिकार गणेश जी की सुंदर और मनमोहक मूर्तियां बनाने में दिन-रात जुटे हैं। इस साल, कारीगरों का ध्यान खास तौर पर पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों पर है, जिसकी मांग भी काफी बढ़ गई है।
इको-फ्रेंडली मूर्तियों की मांग बढ़ी:-
पिछले कुछ सालों से लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हुए हैं। इसी वजह से प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों की जगह अब मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियों को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। एक मूर्तिकार जयराम पंडित ने बताया, ‘इस साल हमारे पास मिट्टी की मूर्तियों के बहुत से ऑर्डर आए हैं। लोग चाहते हैं कि त्योहार का आनंद लें और साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान न पहुंचे’। ये मूर्तियां न केवल दिखने में सुंदर हैं, बल्कि विसर्जन के बाद आसानी से मिट्टी में मिल जाती हैं, जिससे जल प्रदूषण नहीं होता।
कलाकारों को अच्छे कारोबार की उम्मीद
इस साल मूर्तिकारों को अच्छे कारोबार की उम्मीद है। मूर्तिकारों ने बताया कि इस बार पहले से ही मूर्तियों की बुकिंग शुरू हो गई है। उनका मानना है कि इस साल गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाएगी, जिससे उन्हें अच्छी कमाई हो सकेगी।
परंपरा और आधुनिकता का संगम:-
रजौली के कलाकार अपनी कला में पारंपरिक और आधुनिकता का सुंदर मेल कर रहे हैं। वे पुरानी तकनीकों का इस्तेमाल कर मूर्तियां बनाते हैं, लेकिन उनमें आधुनिक कला का स्पर्श भी देते हैं। यह उनकी कला को और भी खास बनाता है। गणेश चतुर्थी का यह पर्व इन कलाकारों के लिए अपनी कला का प्रदर्शन करने का एक बड़ा अवसर है और इससे हमारी स्थानीय कला को भी बढ़ावा मिलता है।










