संतोष कुमार
रजौली मुख्यालय स्थित अनुमंडलीय अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्डों की मनमानी और दुर्व्यवहारपूर्ण व्यवहार से मरीजों एवं परिजनों समेत चिकित्सकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.अस्पताल में गार्ड की नियुक्ति के दौरान बहुत सारे रजौली क्षेत्र के लोगों की नियुक्ति निजी लाभ के तहत कर दिया गया था.लोकल होने के कारण नियुक्त गार्ड सुनिश्चित समय पर अस्पताल परिसर नहीं आते हैं.इसके कारण अस्पताल में आनेवाले मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.अस्पताल के गार्ड द्वारा ना ही कभी ड्रेस कोड का इस्तेमाल किया जाता है और ना ही चिकित्सक समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के आदेशों का पालन किया जाता है.यदि कोई चिकित्सक कुछ कहते हैं,तो गार्ड चिकित्सक से उलझ जाते हैं और अभद्र व्यवहार से चिकित्सक के जुबां को बंद करने पर मजबूर कर देते हैं.
एयर कंडीशन कमरे में चिकित्सक के साथ बैठ करते हैं ड्यूटी :-
अस्पताल के सुरक्षा गार्ड लोकल होने का धौंस मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों पर दिखाते हुए मनमानी पूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं.शनिवार के दिन ओपीडी में डॉ. निवेदिता नंदिनी और डॉ. अनुज कुमार मरीजों को देख रहे थे.वहीं उनके कमरों में चल रहे एयर कंडीशन में सुरक्षा गार्ड सागर कुमार भी एक कुर्सी लगाकर बैठे थे.ओपीडी के मरीज बिना किसी लाइन में लगे धक्का-मुक्की और शोर करते हुए चिकित्सक के पास जाने की होड़ में जुटे हुए थे,जिससे चिकित्सक को मरीजों का इलाज करने में काफी परेशानी हो रही थी.इस दौरान डॉ. अनुज कुमार एक मरीज के ऑपरेशन हेतु 15 मिनट के लिए चले गए.ओपीडी में बैठी महिला चिकित्सक डॉ. निवेदिता नंदिनी ने सुरक्षा गार्ड को दस बार बोली कि ऐसे भीड़ में मरीजों को देखने में परेशानी हो रही है.उसके बावजूद सुरक्षा गार्ड सागर कुमार महिला चिकित्सक की बातों को अनसुना कर अपनी कुर्सी पर डटा रहा.वहीं मरीज जनार्दन प्रसाद ने बताया कि सुरक्षा गार्ड को ओपीडी गेट के बाहर बैठकर मरीजों के भीड़ को नियंत्रित करना चाहिए था,ताकि लोग एक-एक करके अपना इलाज करवा पाएं.
सुरक्षा गार्डों के दुर्व्यवहार से धूमिल हो रही अस्पताल की छवि :-
अनुमंडलीय अस्पताल में इलियट फाल्कन्स द्वारा 10 सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति की गई थी,जिनमें एक महिला सुरक्षा गार्ड की मौत बीते कुछ माह पूर्व हो चुकी है.अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के रूप में सागर कुमार,रामदेव यादव,सुनील कुमार,बृजनंदन कुमार,बबीता देवी,विनोद सिंह,जितेंद्र कुमार-1,जितेंद्र कुमार-2 एवं अखिलेश कुमार हैं.इनमें से किसी के द्वारा गार्ड का यूनिफॉर्म नहीं पहना जाता है.वहीं कुछ सुरक्षा गार्डों के द्वारा अस्पताल में आनेवाले मरीज व उनके परिजन समेत चिकित्सक एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हल्ला-हंगामा एवं अभद्र व्यवहार किया जाता है.सुरक्षा गार्डों की मनमानी से अस्पताल की छवि ग्रामीणों की नजर में धूमिल हो रही है और लोगों को सरकारी व्यवस्था से विश्वास उठते जा रहा है.
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं :-
अस्पताल के प्रभारी डीएस डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि अस्पताल में इलियट फाल्कन्स द्वारा सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराया गया है,जिनमें एक-दो को छोड़कर अन्य सुरक्षा गार्ड द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में काफी अनियमितता बरती जाती है.सुरक्षा गार्ड समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते हैं एवं आदेश की अवहेलना करते हैं,जिसका प्रतिकूल प्रभाव अस्पताल की छवि पर पड़ रहा है.प्रभारी डीएस ने बताया कि सुरक्षा गार्ड को नियुक्त करने वाली संस्था को 2023 से लेकर 2025 तक दो बार स्पष्टीकरण किया गया है.किंतु अबतक कोई जवाब नहीं मिला है,जो इलियट फाल्कन्स के मनमानेपन और स्वेच्छाचारी को दर्शाता है.
क्या कहते हैं सिविल सर्जन :-
इस बाबत नवादा सिविल सर्जन डॉ. बिनोद कुमार चौधरी ने बताया कि अनुमंडलीय अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड से संबंधित शिकायत मिली है.दुर्व्यवहार करने वाले सुरक्षा गार्ड के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी.साथ ही उन्होंने कहा कि वे स्वयं अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्यकर्मियों से बातचीत करेंगे.










