
मनीष कुमार रजौली,(नवादा)
पशुपालकों की आर्थिक उन्नति और पशुधन की प्रजनन क्षमता को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय अंधरवारी के तत्वावधान में ग्राम बंधन छपरा में एक दिवसीय पशु बांझपन निवारण शिविर का भव्य आयोजन किया गया।मंगलवार को आयोजित इस विशेष शिविर में विशेषज्ञों की टीम ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए पशुपालकों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया।कार्यक्रम की कमान भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अभय कुमार, डॉ रेषु कुमार एवं डॉ नीरज कुमार सिंह ने संभाली, जिनके मार्गदर्शन में पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य से जुड़ी गहरी जानकारियां दी गईं। शिविर की सफलता में रजौली प्रखंड की मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई के डॉ बिपिन बिहारी प्रसाद,पप्पू कुमार एवं विद्यासागर कुमार की सक्रिय सहभागिता ने चार चांद लगा दिए, जिससे सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हो सकी।
मुखिया प्रतिनिधि उमेश चौधरी की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में चिकित्सालय के समर्पित कर्मियों उमेश चौधरी,धीरज कपूर, राजू कुमार एवं सुजीत कुमार ने व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित किया, जबकि मैत्री कर्मी संजय कुमार, अशोक प्रसाद और दीपक कुमार के सहयोग से पशुपालकों को पंजीकरण और उपचार में सुगमता हुई। शिविर के दौरान कुल 68 पशुपालकों के 127 दुधारू पशुओं, जिनमें मुख्य रूप से गाय और भैंस शामिल थे, का गहन स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक दवाएं नि:शुल्क वितरित की गईं। उपस्थित पशु चिकित्सकों ने इस अवसर पर पशुपालकों को विस्तार से समझाया कि पशुओं में बांझपन की समस्या अक्सर असंतुलित पोषण, हार्मोनल असंतुलन, समय पर गर्भाधान न होना और परजीवी संक्रमण जैसे कारणों से उत्पन्न होती है, जिसे उचित प्रबंधन और संतुलित खनिज मिश्रण के जरिए दूर किया जा सकता है।
डॉक्टरों ने विशेष जोर देते हुए कहा कि यदि पशुपालक नियमित टीकाकरण, कृमिनाशक दवाओं का समय पर उपयोग और स्वच्छ प्रबंधन अपनाएं, तो पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य को काफी बेहतर बनाया जा सकता है। पूरे आयोजन के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी उत्साह देखा गया और उन्होंने इस पहल को ग्रामीण पशुधन विकास के लिए मील का पत्थर बताया। कार्यक्रम के समापन पर स्थानीय किसानों ने पशुपालन विभाग के इस संवेदनशील प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की और भविष्य में भी इसी प्रकार के तकनीकी शिविरों के निरंतर आयोजन की पुरजोर मांग की ताकि क्षेत्र के किसानों की आय और पशुओं की सेहत में गुणात्मक सुधार लाया जा सके।










