Er. Santosh Kumar
रजौली प्रखंड के स्कूलों में बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित होकर पिछले तीन महीने से लगातार काम कर रहे शिक्षकों को अब तक वेतन नहीं मिला है,जिससे वे बेहद परेशान हैं.शिक्षक नेता अजित कुमार कहते हैं कि,इन शिक्षकों के सभी आवश्यक दस्तावेज,जैसे कि प्राण नंबर और एचआरएएस,तैयार हो चुके हैं,लेकिन वेतन का भुगतान नहीं होने से उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है.सबसे अधिक परेशानी 2006 से 2012 के बीच नियुक्त नियोजित शिक्षकों को हो रही है,जो अब विशिष्ट शिक्षक बन चुके हैं.सक्षमता परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनके वेतन में भारी कटौती की गई है.जहां पहले उन्हें लगभग 50,000 रुपये मिलते थे,वहीं अब सिर्फ 35,000 रुपये दिए जा रहे हैं.वेतन में अचानक इतनी बड़ी कमी से ये शिक्षक हैरान हैं.उन्होंने अपने शिक्षक संघ की सलाह को दरकिनार कर सरकार की बात मानते हुए सक्षमता परीक्षा दी और उसमें उत्तीर्ण भी हुए, लेकिन अब उन्हें कम वेतन मिल रहा है.इनमें से कई शिक्षकों के बच्चे शहर या दूर के इलाकों में पढ़ाई कर रहे हैं.पिछले आठ महीनों से कम वेतन के कारण वे कर्ज लेकर अपने बच्चों की फीस और अन्य खर्च चला रहे हैं.विशिष्ट शिक्षक नियमावली में वेतन निरंतरता और सेवा निरंतरता का भी उल्लेख है,लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है.साथ ही,पूर्व नियोजित शिक्षकों को मिलने वाली पदोन्नति भी रोक दी गई है,जबकि इस संबंध में माननीय उच्च न्यायालय के कई आदेश भी हैं.शिक्षकों को स्थानांतरण में भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.कई शिक्षक, जिन्होंने स्थानांतरण की इच्छा जाहिर की थी,उनका तबादला भी नहीं हो पाया है.रजौली के शिक्षक नेता अजित कुमार ने बताया कि शिक्षक पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं और विद्यालय के सभी निर्देशों का अक्षरशः पालन कर रहे हैं.उन्होंने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, और अपर मुख्य सचिव सिद्धार्थ से शिक्षकों की मूलभूत समस्याओं को जल्द से जल्द दूर करने का अनुरोध किया है,ताकि बिहार की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े.उनका कहना है कि शिक्षकों का समस्यामुक्त होना विद्यालय के बेहतर वातावरण के लिए अत्यंत आवश्यक है.










