मनीष सिंह (रजौली)
देश में आगामी फरवरी 2027 से शुरू होने वाली जनगणना की तैयारी के तहत रजौली में चल रहे प्री-टेस्ट का द्वितीय चरण शनिवार को संपन्न हो गया। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के अंतिम दिन जनगणना निदेशालय, पटना से आए सहायक निदेशक राकेश गुप्ता ने रजौली प्रखंड सभागार में प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों से विस्तार से फीडबैक लिया। कार्यक्रम में जनगणना के नोडल पदाधिकारी अनूप कुमार वर्मा और सौरभ कुमार भी उपस्थित थे। भारत सरकार द्वारा जनगणना 2027 को पूरी तरह पेपरलेस और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से देशभर में प्री-टेस्ट कराया जा रहा है। बिहार में इसके लिए सोनपुर के अलावा नवादा जिले के रजौली प्रखंड को चुना गया है। रजौली में जोगियामारण, सिरोडावर और चितरकोली इन तीन पंचायतों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत शामिल किया गया है।
15 दिनों तक चला डाटा संग्रह का काम :-
प्री-टेस्ट की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की गई। 1 से 3 जुलाई तक रजौली प्रखंड में 87 प्रगणकों और 15 पर्यवेक्षकों को नए जनगणना ऐप और प्रक्रिया को लेकर गहन प्रशिक्षण दिया गया। 4 और 5 जुलाई को ग्रामीणों द्वारा स्वगणना की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बाद 6 जुलाई से 18 जुलाई तक प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की टीम ने तीनों पंचायतों के प्रत्येक घर में जाकर परिवार के सदस्यों, आवास, शौचालय, पेयजल, आय और अन्य सामाजिक-आर्थिक बिंदुओं से संबंधित डाटा मोबाइल ऐप के माध्यम से संग्रहित किया।
ऐप और फील्ड की समस्याओं पर हुई चर्चा :-
समापन सत्र में सहायक निदेशक राकेश गुप्ता ने सभी प्रगणकों से वन-टू-वन संवाद किया। उन्होंने ऐप में डाटा एंट्री, जीपीएस लोकेशन, फोटो अपलोड और नेटवर्क की समस्या को लेकर जानकारी ली। नोडल पदाधिकारी अनूप कुमार वर्मा ने बताया कि प्रगणकों ने फील्ड में आने वाली कुछ तकनीकी परेशानियों और ग्रामीणों के सवालों को लेकर सुझाव दिए हैं। सभी फीडबैक को एक रिपोर्ट के रूप में जनगणना निदेशालय को भेजा जाएगा, ताकि फरवरी 2027 में होने वाली वास्तविक जनगणना को और अधिक सुगम बनाया जा सके।
19-20 जुलाई को रिवीजनल राउंड :-
अधिकारियों ने बताया कि प्री-टेस्ट के बाद अब 19 और 20 जुलाई को रिवीजनल राउंड चलाया जाएगा। इस दो दिवसीय अभियान में उन परिवारों को शामिल किया जाएगा जो पहले किसी कारणवश छूट गए थे। इसका उद्देश्य शत-प्रतिशत डाटा कवरेज सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक अभ्यास है। जनगणना 2027 की वास्तविक प्रक्रिया फरवरी माह से पूरे भारत में एक साथ शुरू होगी और इसमें कागज का उपयोग नहीं होगा।











